वेद हिमाशु शुजालपुर मे रेवे हे.खूब अच्छो लिखे हे..मालवी में , हिन्दी में.
आज बाँचो वेद हिमांशु का मालवी हाईकू.थोड़ा सा शब्द हे पण घाव केसो गेरो
करे हे आप भी देखो.
>
ऊ पियासो थो
नद्दी में उतरियो
ने डूबी गयो
>
घणी उदास
चुपचाप वा देखे
मनी पिलांट
>
क्रांति करोगा ?
घर से सुरू करो
जीती जावोगा
Friday, 29 February 2008
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment