tag:blogger.com,1999:blog-432508839214365084.post84803796726167441..comments2008-12-01T19:42:31.503-08:00Comments on मालवी जाजम......बोलोगा तो बचेगी मालवी: तपते मौसम में हिन्दी तर्जुमे के साथ मालवी की ग़ज़ल !...मालवी जाजमhttp://www.blogger.com/profile/10905821853128369906noreply@blogger.comBlogger5125tag:blogger.com,1999:blog-432508839214365084.post-33329098059424191532008-05-02T00:42:00.000-07:002008-05-02T00:42:00.000-07:00प्रवास कारण टिप्पणियाँ जारी करने में विलम्ब हुआ .....प्रवास कारण टिप्पणियाँ जारी करने में विलम्ब हुआ ...क्षमा करें...अभिभूत हूँ आपकी दाद से.बोलियों का वैभव इंटरनेट पर बढ़े इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है.आप सकी का प्रेम माय (माँ)मालवी के चरणों में पहुँचे ...प्रार्थना यही.मालवी जाजमhttp://www.blogger.com/profile/10905821853128369906noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-432508839214365084.post-82339401084336590612008-05-01T08:04:00.000-07:002008-05-01T08:04:00.000-07:00फीकी साँझ -रात नफ़रत कीनिपट ये निरजले उपवास के दिनv...फीकी साँझ -रात नफ़रत की<BR/>निपट ये निरजले उपवास के दिन<BR/>vah vah..DR.ANURAG ARYAhttp://www.blogger.com/profile/02191025429540788272noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-432508839214365084.post-5463713239968291002008-04-30T22:38:00.000-07:002008-04-30T22:38:00.000-07:00जनबोली मालवी में लिखी बेहतरीन गज़ल . अगर हिंदी अनुव...जनबोली मालवी में लिखी बेहतरीन गज़ल . अगर हिंदी अनुवाद न भी होता तो भी अस्सी-नब्बे प्रतिशत समझ में आ ही जाता . शायद राजस्थानी के बहुत निकट/उसका हिस्सा होने की वजह से ऐसा हुआ हो . जो सिर्फ़ खड़ी बोले जानते हैं उन्हें अनुवाद से मदद मिलेगी .<BR/><BR/>हिंदी की सभी उपभाषाओं/बोलियों के साहित्य को प्रोत्साहन मिलना चाहिए,वरना खड़ी बोली हिंदी अपना रूप,रस,गंध खोकर सूखे चमड़े जैसी हो जाएगी . बोलियां वह सुआ हैं जिसमें हिंदी की जान बसती है . वे गंधहीन हिंदी की सुगंध हैं .<BR/><BR/>आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं .Priyankarhttp://www.blogger.com/profile/13984252244243621337noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-432508839214365084.post-53643696598236804782008-04-30T09:23:00.000-07:002008-04-30T09:23:00.000-07:00आदरणीय बाबुजी मालवी माँ कहूँ तो घणी खम्मा !! बेहद ...आदरणीय बाबुजी मालवी माँ कहूँ तो घणी खम्मा !!<BR/><BR/> बेहद लुभावनी रचना परूसने के लिये आपका आभार ! <BR/>-- लावण्या शाहLavanyam - Antarmanhttp://www.blogger.com/profile/15843792169513153049noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-432508839214365084.post-74132888362561496962008-04-30T08:11:00.000-07:002008-04-30T08:11:00.000-07:00अभी तक आपकी मालवी की मिठास अनुभव ही कर पाता था, आज...अभी तक आपकी मालवी की मिठास अनुभव ही कर पाता था, आज समझ भी पाया. अत्यन्त आनददायी अनुभवmaithilyhttp://www.blogger.com/profile/09288072559377217280noreply@blogger.com